बढ़ती आत्महत्याओं को कैसे रोका जा सकता है ?

 

वॉशिंगटन। पिछले कुछ वर्षों से आत्महत्या करने वालों की संख्या में काफी इजाफा हो गया है। सामाजिक स्टेटस और आर्थिक असुरक्षा जैसे तमाम कारण आत्महत्या की वजह हैं। लेकिन कोई व्यक्ति खुदकुशी करने जा रहा है, क्या इस बात का पता पहले से ही लगाया जा सकता है ? अमेरिका में हुए एक अध्ययन की मानें तो ऐसा संभव है। स्टडी में कहा गया है कि ब्रेन स्कैन के जरिये यह पता चल सकता है कि किसी व्यक्ति को खुदकुशी के ख्याल आ रहे हैं या नहीं। इस स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर से पीड़ित व्यक्ति के मन में खुदकुशी के आ रहे विचार से जुड़ा एक रासायन पाया गया है।
आम लोगों की तुलना में पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस से पीड़ित व्यक्ति में खुदकुशी का खतरा अधिक रहता है, लेकिन बेहद खतरे वाले व्यक्ति की पहचान मुश्किल है। अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया शोध प्रोसिडिंग्स ऑफ द नैशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज में पब्लिश हुआ है। उन्होंने एमग्लूआर5 का स्तर जांचने के लिए पीईटी तस्वीरों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस से पीड़ित लोगों में एमग्लूआर5 का स्तर बेहद अधिक है जिससे कोई व्यक्ति एंजायटी और मूड डिसॉर्डर से पीड़ित हो जाता है।
पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस से पीड़ित लोगों के लिए दो तरह का अप्रूव्ड इलाज है, लेकिन यह जांचने में कि ये प्रभावी हैं या नहीं इसमें कई सप्ताह और महीनों लग सकते हैं। येल की असोसिएट प्रफेसर इरिना ईस्टरलिस ने कहा, अगर आपके पास ऐसे लोग हैं जो उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, तो आप तुरंत रक्तचाप कम करना चाहते हैं। लेकिन पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस में हमारे पास वह विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि एमग्लूआर5 के स्तर की जांच से उन लोगों की पहचान में मदद मिल सकती है जिनमें खुदकुशी का खतरा सबसे अधिक है और उन्हें तुरंत चिकित्सीय मदद दी जा सकती है। इरिना ने साथ ही कहा कि एमग्लूआर5 के स्तर को संतुलित रखकर खुदकुशी के खतरे को कम किया जा सकता है।
लेकिन सवाल यह भी है कि इतना ध्यान कौन रखेगा ? क्या आत्महत्या की वजहों को समाप्त करने के बारे में नहीं सोचा जाना चाहिए। यह वजहें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में समाज और सरकारों को क्या यह नहीं सोचना चाहिए कि हर व्यक्ति को ऐसी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिले जिसमें आदमी अपनी सहजता में जी सके और कोई किसी से कमतर और कोई उच्चतर न माने और सबको रोजी-रोटी और अन्य सुविधाएं हासिल हों।

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