घट रही एटीएम की संख्या – कैश पर लोगों को ज्यादा भरोसा – एटीएम बैंकों के लिए खर्चीला और ग्राहकों के लिए असुरक्षित !

 

नई दिल्ली। बैंक उपभोक्ता अपनी जमा राशि आसानी से किसी भी वक्त निकाल सकें इसके लिए एटीएम की व्यवस्था की गई। लोगों ने इस सुविधा का स्वागत और खूब उपयोग भी किया। लेकिन लंबे समय से यह बैंकों पर भारी पड़ रहा है और बैंक एटीएम घटाने में लगी हैं। इसकी वजह एटीएम मशीनों के संचालन के लिए नियमों में सख्ती होना है। शनिवार को भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में ट्रांजैक्शंस में इजाफा होने के बावजूद एटीएम की संख्या में कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिक्स देशों में प्रति एक लाख व्यक्ति पर एटीएम की संख्या के मामले में भारत सबसे पीछे है।
नोटबंदी के बाद एटीएम की हालत ज्यादा खराब हो गई है। आज भी बहुत से एटीएम में लोगों को पैसा नहीं मिलता। वे एक एटीएम से दूसरे एटीएम मारे-मारे फिरते हैं। नौकरीपेशा लोगों को खासी परेशानी होती है। असल में यह अपनी ड्यूटी टाइम में बैंक जा नहीं सकते और ड्यूटी के बाद एटीएम के चक्कर लगाना मजबूरी है। कंपनियां सीधे खाते में पैसा ट्रांसफर करती हैं। लोग नोटबंदी के बाद से और ज्यादा अपने पैसे को लेकर आशंकित रहते हैं, कि कहीं बैंक में पैसा न फंस जाए। जिनका काम नकद लेन-देन से चल जाता है वे बैंक के लफड़े से बचने का प्रयास करते हैं। आये दिन साइबर अपराधी लोगों के खातों में एटीएम नंबर के जरिये सेंध लगाते रहते हैं। आम आदमी की आय कम है इसलिए बैंक को वे ज्यादा शुल्क देने की स्थिति में नहीं हैं, बैंकें भी ज्यादा शुल्क लेने से बचते हैं क्योंकि अभी जो बैंक खातों और लेन-देन पर शुल्क लागू हैं लोगों को वही भारी पड़ते हैं। एटीएम संचालन महंगा काम है जो बैंकों पर भारी पड़ रहा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक की ओर से सुरक्षा नियमों को सख्त करने के आदेशों के चलते बैंकों और एटीएम को जरूरी बदलाव करने पड़ रहे हैं। इसके चलते एटीएम और बैकों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में एटीएम की संख्या कम करने में ही बैंक अपनी भलाई समझ रहे हैं। मोदी सरकार की ओर से नोटबंदी किए जाने के बाद भी अब भी भारत में कैश ही कारोबार और लेनदेन में प्रमुख है।
हिताची पेमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर रुस्तम इरानी के मुताबिक एटीएम की लगातार घटती संख्या के चलते आने वाले समय में लोगों को मुसीबत होगी। जानकारों के मुताबिक एटीएम संचालन की लागत बढ़ी है, जबकि बैंकों को जिस फीस के चलते रेवेन्यू मिलता है, वे उसे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर आर. गांधी के मुताबिक एटीएम ऑपरेटर उन बैंकों से इंटरचेंज फीस वसूलते हैं, जिनका कार्ड इस्तेमाल किया जाता है। इस फीस का इजाफा न होने के चलते एटीएम की संख्या में कमी आ रही है। यही जमीनी सच्चाई है।

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