केंद्र और राज्य सरकारों में लाखों पद खाली – पांच साल याद नहीं आई – अब पीएमओ ने जानकारी मंगाई !

 

बेंगलुरु। नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। इस बीच में नौकरियां देने के बजाय लाखों खाली पड़े पद खत्म कर दिए। नोटबंदी और जीएसटी लगाकर करोड़ों नौकरी/रोजगार खत्म कर दिए। वर्तमान लोकसभा चुनाव में मोदी ने रोजगार आदि जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात ही नहीं की। अबे केंद्र सरकार के कर्मचारी प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में खाली पदों का डेटा इकट्ठा करने के काम में लगे हुए हैं। पीएमओ ने यह कदम कदम विपक्ष के उन आरोपों के बाद उठाया है जिसमें कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार नए रोजगार के मौकों का सृजन करने में तो असफल रही ही है, साथ ही वर्तमान में खाली पड़े सरकारी पदों पर भी नियुक्ति नहीं की जा रही हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के इन निर्देशों के बाद मंत्रालयों और विभागों में आंतरिक सर्कुलर जारी किया गया है और वहां पदों की संख्या और खाली पदों के बारे में जानकारी मांगी गई है। इस बारे में 3 मई को जारी किए गए अंडरसेक्रटरी फणी तुलसी के द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक, वित्त मंत्रालय को सूचित किया गया है कि जल्द ही इस संबंध में पीएमओ द्वारा एक मीटिंग रखी जाएगी जिसमें विभिन्न विभागों में खाली पदों पर चर्चा की जाएगी। इसमें 30 अप्रैल 2019 तक खाली विभिन्न पदों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिसटिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन के मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गुरुवार को कहा, प्रधानमंत्री इस समय लोकसभा के कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। मुझे नहीं पता लगता है कि ऐसी कोई जानकारी जुटाई जा रही है। मेरे मंत्रालय में लगभग 6 हजार कर्मचारी हैं और मैंने ऐसा कोई सर्कुलर नहीं देखा है। बता दें कि इससे पहले नौकरियों पर एनएसएसओ के डेटा लीक होने के मामले में भी सदानंद गौड़ा लगातार सरकार का बचाव करते रहे हैं।
केंद्रीय सरकार कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष केकेएन कुट्टी ने कहा, पिछले 5 सालों में यह सरकार हमसे बातचीत ही नहीं कर रही है। इस सरकार द्वारा पहली नैशनल काउंसिल की मीटिंग चुनावों की घोषणा होने के बाद 13 अप्रैल को बुलाई गई थी। सरकार हमसे उस अजेंडे पर चर्चा करना चाहती थी जो हमने सरकार बनते समय 5 साल पहले भेजा था।श् केंद्र सरकार में खाली पदों के बारे में उन्होंने कहा कि इस काम में दो समस्याएं हैं। पहला कि स्टाफ सिलेक्शन कमीशन को खाली पदों की जानकारी दिए जाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे और दूसरा एसएससी उतने लोगों की भर्ती नहीं कर पा रहा है जितने लोगों की जरूरत है।
कुट्टी ने कहा, विभिन्न विभागों में 40 से 50 पर्सेंट पद खाली हैं। इनकम टैक्स विभाग में 50 पर्सेंट और सीएजी में 45 पर्सेंट पद खाली हैं। ये सभी पद सरकार द्वारा स्वीकृत हैं लेकिन इन पर भर्ती नहीं की जा रही हैं। अब ऐसी वेकंसी का डेटा इकट्ठा करने की रिपोर्ट्स अगर इस समय सामने आ रही हैं तो इनका कोई मतलब नहीं है। इस मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह कॉमेंट के लिए उपलब्ध नहीं थे।
ऑल इंडिया डिफेंस इंप्लॉयी फेडरेशन के जनरल सेक्रटरी सी श्रीकुमार ने कहा, जब इतने सालों में कुछ नहीं किया गया तो अब यह सब करने की क्या जरूरत है। यहां तक कि 13 अप्रैल को हुई मीटिंग में भी हमने कैबिनेट सेक्रटरी के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। ऐसा लगता है कि जब यह सरकार दोबारा में सत्ता में आएगी तो कुछ घोषणा करने के लिए यह सारी कवायद की जा रही है। इसी संबंध में ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन के वर्किंग प्रेजिडेंट एन कन्हैया ने कहा कि केवल रेलवे में ही इस समय 3.8 लाख पद खाली हैं लेकिन सरकार द्वारा इन पर भर्तियां करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।

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