ई-वॉलिट का इस्तेमाल करते हैं तो जान लें उसकी खूबियां और खामियां !

 

नई दिल्ली। स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले बहुत लोग ई-वॉलिट (इलेक्ट्रॉनिक वॉलिट) ई-वॉलिट का भी इस्तेमाल करते हैं। इसका प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अपने मोबाइल में ई-वॉलिट की ऐप डाउनलोड कर, उसमें पैसे डाल लिए जाते हैं या अकाउंट अथवा क्रेडिट कार्ड से जोड़ लिया जाता है। ऐसा करने पर आपका मोबाइल आपका बटुआ भी बन जाता है। आपको कैश, एटीएम क्रेडिट कार्ड रखने की अनिवार्यता नहीं होती। नाई, आॅटो वाले, चाय वाले, ठेली व्यवसायी तक इनका इस्तेमाल करने लगे हैं। इसलिए ई-वॉलिट का इस्तेमाल यात्रा, किराना खरीद, रेस्टोरेंट की पेमेंट करने तथा और अन्य तरह के भुगतान करने में खूब हो रहा है। टैक्नोलौजी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। आॅनलाइन/ साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है। आज भी कैश से अधिक सुरक्षित कोई लेन-देन नहीं है। बैंकों के साथ फ्राॅड खूब हो रहे हैं। हैकर्स लोगों के बैंक खातों और ई-वॉलिट से पैसा उड़ा ले रहे हैं। इसलिए सावधानियां रखनी चाहिएं। बहुत सही तो यह होगा कि आप चाहे लेन-देन के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल करते हों या ई-वॉलिट का, अपनी सैलरी या सेल इत्यादि का पैसा एक ही जगह न रखें। उसे थोड़ा-थोड़ा अलग-अलग बैंक एकाउंट्स और ई-वॉलिट्स में रखें। एक ही जेब में सारा कैश न रखें, थोड़ी-थोड़ी रकम कम से कम तीन जेबों में रखें।
-ऑनलाइन खरीदारी से लेकर किराना दुकान पर पेमेंट तक में मोबाइल वॉलिट का प्रयोग कर सकते हैं।
-टीडीएच या मोबाइल हर तरह के रिचार्ज, लगभग हर तरह के बिल पेमेंट, एलपीजी सिलेंडर पेमेंट आदि में प्रयोग किया जा सकता है।
-ट्रेन, प्लेन, मूवी आदि की टिकट बुक करने पर इसका पेमेंट आप इन वॉलिट के जरिए कर सकते हैं।
मोबाइल वॉलिट का प्रयोग करना काफी आसान है। हर वॉलिट कंपनी का ऐप होता है। उस ऐप को मोबाइल में इंस्टॉल करें और ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालकर इसका इस्तेमाल शुरू कर दें। एक बार लॉगइन करने के बाद आप अपनी सुविधा के अनुसार इस वॉलिट से अपना बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड जोड़ सकते हैं या इसमें अपने अनुसार पैसे डाल सकते हैं।
फिलहाल अधिकतर कंपनियों के वॉलिट में आप 10 हजार रुपये तक ही डाल सकते हैं। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वॉलिट सर्विस मुहैया करने वाली सभी कंपनियों से वॉलिट यूजर्स की केवाईसी कंप्लीट कराने को कहा है। अगर आपकी केवाईसी पूरी है, तो आप वॉलिट में 1 लाख रुपये तक डाल सकते हैं।
मोबाइल वॉलिट का प्रयोग उन्हीं लोगों को करना चाहिए जो टेक्नोफ्रेंडली हैं।
अगर आप ऐसी जगह हैं जहां अच्छी स्पीड वाला इंटरनेट नहीं है, तो आपको पेमेंट करने में परेशानी हो सकती है।
मोबाइल वॉलिट सर्विस प्रोवाइडरों से बहुत कम संख्या में व्यापारी दुकानदार जुड़े हैं।
मोबाइल वॉलिट से रोजाना खर्च की सीमाएं हैं। आप इसके जरिए रोजाना लाखों रुपये का पेमेंट नहीं कर सकते।
-मोबाइल वॉलिट होने से आपको न कैश की जरूरत पड़ती है और न ही डेबिट या क्रेडिट कार्ड की। यही नहीं किसी मर्चेंट या दूसरी जगह पेमेंट करते समय छुट्टे पैसे अदा कराने से भी मुक्ति मिल जाती है।
-कैश या कार्ड लेकर चलने से उसके चोरी होने या गिरने का डर रहता है। ऐसे में कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है। लेकिन मोबाइल वॉलिट का प्रयोग किसी दूसरे के लिए करना बहुत मुश्किल है।
-आप एक वॉलिट ऐप में अपने कई बैंक अकाउंट और क्रेडिट कार्ड जोड़ सकते हो और इनमें से किसी से भी पेमेंट कर सकते हो।
-मोबाइल वॉलिट के जरिए पेमेंट करने पर काफी कंपनियां आपको कैशबैक का भी ऑफर देती हैं।
हर मोबाइल वॉलिट में अपना पासकोड रखें। यह पासवर्ड वॉलिट के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन को सुरक्षित रखता है। पासकोड लगा दिया हो तो मोबाइल खोने की स्थिति में कोई अनजान व्यक्ति वॉलिट का प्रयोग नहीं कर पाएगा।
आप अपने मोबाइल वॉलिट में ऐप लॉक का प्रयोग करें। अगर कभी आपको फोन अनलॉक रह गया, तो ऐसे में ऐप में लॉक लगा होने से उसका दुरुपयोग नहीं हो सकता।
जब आप अपने बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड के जरिए मोबाइल वॉलिट में कैश डालते हैं, तो हो सकता है कि आपके मोबाइल का नेटवर्क स्लो हो जाए और कैड अपलोड होने में कुछ समय लगे। जब तक आपका ट्रांजैक्शन फेल या सक्सेसफुल होने का नोटिफिकेशन न मिल जाए तब तक मोबाइल को रीस्टार्ट या रिफ्रेश या एप्लीकेशन को बैक न करें। ऐसे में हो सकता है कि रकम आपके अकाउंट से कट जाए लेकिन वॉलिट में न जुड़ पाए।
इस प्रकार के वॉलिट ऑनलाइन कंपनियों के होते हैं। इनमें आप न तो कैश जमा कर सकते हैं और न ही हर जगह पेमेंट के लिए इनका प्रयोग कर सकते हैं। इन कंपनियों से मंगाया कोई प्रोडक्ट अगर आप वापस करते हैं, तो ये कंपनियां आपके द्वारा दिए गए पैसे को या तो आपके बैंक अकाउंट में डालती हैं या आपके वॉलिट में। वॉलिट में पैसे आने के बाद आप इन पैसों का प्रयोग सिर्फ इन्हीं कंपनी के प्रोडक्ट की खरीदारी में कर सकते हैं। मिंत्रा, मेकमायट्रिप, जबॉन्ग, ग्रोफर्स आदि कंपनियां क्लोस्ड वॉलिट का उदाहरण हैं। इन वॉलिट के जरिए भी कैश तो नहीं निकाला जा सकता लेकिन कहीं भी पेमेंट जरूर किया जा सकता है। हालांकि इस प्रकार के वॉलिट के जरिए आप उन्हीं जगह पेमेंट कर सकते हैं, जहां वॉलिट कंपनी का दूसरी कंपनियों के साथ टाई-अप हो। भीम ऐप, पेटीएम, फोनपे, गूगलपे आदि कुछ इस तरह के वॉलिट के उदाहरण हैं। ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन ने भी इसी तरह का वॉलिट शुरू किया है।
ये इस तरह के वॉलिट होते हैं, जिनसे कैश भी निकाला जा सकता है। इसके अतिरिक्त ये सेमी-क्लोज्ड वॉलिट की तरह भी काम करते हैं। इस तरह के वॉलिट बैंक अकांउट से जुड़े होते हैं और बैंक द्वारा ही जारी किए जाते हैं। अगर आप ओपन वॉलिट के जरिए ऑनलाइन कुछ खरीदते हैं और पसंद न आने पर उसे वापस कर देते हैं तो पैसा आपके बैंक अकाउंट में ही वापस आता है और उसे आप कहीं भी और कैसे भी खर्च कर सकते हो। वोडाफोन का एम-पैसा ऐप, एसबीआई का योनो ऐप ओपन वॉलिट का ही उदाहरण है।

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