तीन तलाक पर कानून बड़े राजनैतिक लाभ के लिए ! व्यापक जनता को उल्लू बनाना है मुख्य मकसद ! आम जनता की लगातार हालत खराब है, उसकी फिक्र नहीं !

 

नई दिल्ली। मोदी सरकार की खासियत रही है कि वह पुरानी योजनाओं, परियोजनाओं को अपना बताकर करोड़ों रुपये फूंककर अपना प्रचार करती रही है। कोर्ट के फैसलों को भी उसने अपनी उपलब्धि के रूप में पेशकर प्रचार पाया है। तमाम ऐसी योजनाओं के जरिये अपना प्रचार किया गया जिनका जनता को लाभ नहीं मिला। स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, महंगाई, रोजगार, आवास, रोड, बिजली, पानी तमाम क्षेत्रों में भारत की हालत बेहद खराब है लेकिन चालबाज मोदी सरकार फालतू के मुद्दे उछालकर वाह-वाही लूट रही है। तीन तलाक बिल मंगलवार को राज्यसभा से पारित हो गया और राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही यह कानून की शक्ल ले लेगा। इस बीच विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर एक बार फिर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने कहा कि एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को आपराधिक कृत्य बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इस प्रथा को उच्चतम न्यायालय ‘शून्य एवं अमान्य’ करार दे चुका है।
पार्टी के सीनियर लीडर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘हमने बुनियादी तौर पर इस विधेयक का समर्थन किया था। हम इसमें संशोधन चाहते थे ताकि मुस्लिम महिलाओं को सहयोग मिल सके। हमारा विरोध दो-तीन मुद्दों पर था।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को ‘शून्य एवं अमान्य’ कर दिया है, ऐसे में इसे फौजदारी का मामला बनाने की क्या जरूरत है। इसके अलावा एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट किया, मैं उम्मीद करता हूं कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसकी संवैधानिकता को चुनौती देगा। इससे भारत के संवैधानिक मूल्यों और बहुलता को बचाया जा सकेगा। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा कि तीन तलाक को लेकर कानून बनाने की क्या जरूरत थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही इसे अवैध करार दिया है। इससे साफ है कि यह मुस्लिम लोगों को दंडित करने की कोशिश है।

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