नेपाल में मोटे फौजियों को पदोन्नति नहीं, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में हिस्सा लेने से रोका, कंट्रोल न करने पर जा सकती है नौकरी

 

काठमांडू। नेपाल सरकार अपने फौजियों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए प्रयत्नशील है। नेपाल सेना ने अपने उन सात वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है जिनका वजन सामान्य से काफी ज्यादा पाया गया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। हिमालयन टाइम्स ने गुरुवार को खबर दी कि अधिक वजन वाले तीन अधिकारियों को पदोन्नति नहीं दी गई है जबकि चार अन्य को संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। उनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) काफी ज्यादा था।
बीएमआई परीक्षण से पता चलता है कि व्यक्ति का वजन सामान्य से कम है, सेहत के अनुरूप है, अधिक है या वह मोटा है। नेपाल सेना के प्रवक्ता बिज्ञान देव पांडे के हवाले से अखबार ने कहा कि सात अधिकारियों में से तीन को सेना ने पदोन्नति देने से इनकार कर दिया है और चार अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र मिशन में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी गई है क्योंकि उनका बीएमआई बहुत ज्यादा था। सेना ने वजन को स्पष्ट तौर पर चार श्रेणियों में बांटा हुआ है- स्थूलकाय (मोटा), अधिक वजन, सामान्य और कम वजन। अगर किसी का बीएमआई 30 से ज्यादा है तो वह मोटा है और अगर यह 25.25 से 29.9 के बीच है तो उसका वजन ज्यादा है। इस तरह अगर किसी का बीएमआई 18.5 से 25.25 है तो उसका वजन सामान्य है और किसी का बीएमआई 18.5 से कम है तो उसका वजन सामान्य से कम है।
रिपोर्ट में कहा गया कि आयु वर्ग और लिंग के अनुरूप बीएमआई अलग-अलग है। पांडे ने बताया कि वजन नियंत्रित करने के लिए तीन माह से तीन साल का वक्त दिया गया है। पांडे ने बताया कि हाल में मां बनी महिलाओं को वजन कम करने के लिए एक साल का समय दिया गया है। अगर वह दिए गए वक्त में वजन कम करने में विफल रहती हैं तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। अगर मेडिकल बोर्ड कहता है कि कर्मी अनफिट है तो उसे बर्खास्त किया जाएगा। नेपाल सेना ने अपने कर्मियों के लिए स्वास्थ्य प्रक्रिया 15 फरवरी, 2018 को निर्धारित की थी।

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