दिल्ली-एनसीआर में भूजल की भारी कमी, विकास का माॅडल न बदला तो शिवालिक की पहाड़ियां तक हो जाएंगी बंजर ! मानव और अन्य प्राणी पानी, भोजन और छाया के अभाव में तड़पेंगे… प्रकृति ही ईश्वर है

 

करनाल (हरियाणा)। मुनाफाखोर व्यवस्था जल, जंगल, जमीन को खत्म करने में लगी है। जीव और वनस्पति जगत के अस्तित्व पर संकट है। सरकारें और उसे संचालित करने वाली शक्तियों को तात्कालिक लाभ से मतलब है। इसके लिए वे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रही हैं। सरकारें इसे विकास बताकर जनता को मूर्ख बना रही हैं। यही हाल रहा तो जल्द ही चारों ओर वीरानापन पसरेगा। मानव और अन्य प्राणी बूंद-बंूंद पानी, भोजन और छाया के अभाव में तड़पेंगे। अगर हमने विकास की परिभाषा को समय रहते नहीं बदला तो राजस्थान का बढ़ता हुआ रेगिस्तान शिवालिक की पहाड़ियों तक पहुंचे जाएगा। 2019 में 190 जिले ऐसे हैं, जिनका भूजल डार्क जोन से भी नीचे चला गया है। यह चिंता प्रख्यात पर्यावरणविद डा. राजेंद्र सिंह ने एनडीआरआई में फाउंडेशन कोर्स के दौरान जल शक्ति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में जताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेरठ जैसे शहरों का भूजल खत्म होने वाला है। मैग्सेसे सम्मान से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने कहा कि पानी जीवन का आधार है, लेकिन तेजी से विकसित हो रहे समाज ने पानी को वस्तु बना दिया है। पानी पंचभूतों में से एक है, जीवन है जिंदगानी। उन्होंने कहा कि भारत के लोग भगवान की पूजा करते है, ऐसे में भगवान का अर्थ है भ से भूमि, ग से गगन, व से वायु, अ से अग्रि और न से नीर, यानि प्रकृति ही ईश्वर है। लेकिन दुर्भाग्यवश समाज जैसे-जैसे विकसित और सभ्य होता गया, वैसे-वैसे प्रकृति को नष्ट करता गया।
उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तब शायद ही भारत का कोई ऐसा जिला था, जिसके धरती के नीचे का पानी नहीं था। अब 190 जिले ऐसे है, जिनका भू-जल डार्क जोन के नीचे चला गया। उन्होंने कहा कि अगर धरती पर पानी नहीं होगा तो डेयरी फार्मिंग की भी कल्पना नहीं की जा सकती। किसी भी तरह की उपज की कल्पना नहीं की जा सकती। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डा. शाहा, डा. आर के मलिक, डा. ऐके सिंह, डा. राजीव कपिला, डा. अरुण मिश्रा, डा. मीना मलिक, डा. सुमन कपिला मौजूद थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. आरआरबी सिंह ने कहा कि एनडीआरआई परिसर की एक-एक बूंद बारिश के पानी को वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से भू गर्भ जल को रिचार्ज करते है। हमें चाहिए कि पानी की बर्बाद बिल्कुल नहीं होने दे।

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