लिव इन रिलेशन अवैध, महिला की स्थिति रखैल जैसी, राजस्थान मानवाधिकार आयोग महिला-पुरुषों के बिना ‘विधिवत विवाह’ किये एक साथ रहने के खिलाफ !

 

जयपुर। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की मानी गई तो सहजीवन या लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल्स बेचैन हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशन को सही ठहराया है। लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा इसे खराब मानता है। किसी महिला के द्वारा बिना विवाह किये किसी पुरुष के साथ रहना सहज स्वीकृत और प्रतिष्ठित नहीं है। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को राज्य सरकार से लिव-इन रिलेशनशिप की बढ़ती हुई प्रवृत्ति को रोकने के लिए और समाज में महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाने की अनुशंसा की है। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश टाटिया और न्यायाधीश महेश चंद्र शर्मा की एक खंडपीठ ने बुधवार को राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार से अनुशंसा की है कि इस मामले में कानून बनाएं।
आयोग ने केंद्र सरकार से भी कानून बनाने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि आयोग के समक्ष लिव-इन रिलेशनशिप के कुछ मामले सामने आने के बाद कुछ महीने पूर्व सभी हितधारकों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में कानून बनाने के लिए सुझाव मांगे गए थे। सभी हितधारकों के सुझावों और उनकी कानूनी राय के बाद आयोग ने पाया कि हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार है, जो कि भारतीय संविधान में मूल अधिकारों में शामिल है। खंडपीठ ने अपनी अनुशंसा में कहा, किसी महिला का रखैल जीवन किसी भी दृष्टि से महिला का सम्मानपूर्वक जीवन नहीं कहा जा सकता है। रखैल अपने आप में ही अत्यंत गंभीर चरित्र हनन करने वाला और घृणित संबोधन है।

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