न्यायालय ने दिया फैसला, मुर्गे को बांग देने का अधिकार – मुर्गे को बचाने के लिए एकजुट हुए लाखों लोग

 

पैरिस। सदियों-सदियों लोगों को मुर्गे की बांग से सुबह होने का पता चलता रहा। लेकिन वक्त बदला और अधिकांश लोगों की मुर्गे पर निर्भरता खत्म हो गई। लेकिन अपने स्वभाव के अनुसार मुर्गे बांग देते रहे। पहले और अब भी बहुतों को मुर्गे की आवाज अखरती रही है। ऐसा ही एक व्यक्ति के साथ फ्रांस में हुआ। उसे मुर्गे की बांग से दिक्कत थी। मामला सुबह जाग जाने का था। मामला अदालत तक चला गया। आखिरकार जीत मुर्गे की ही हुई और कोर्ट ने भी कह दिया कि मुर्गे को अपने सुर में गाने का पूरा अधिकार है। दरअसल मुर्गे के बोलने पर उसके मालिक क्रोनी के पड़ोसी को ऐतराज था और इसलिए मामला कोर्ट तक खिंच गया।
केस कोर्ट में जाने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर की बहस बन गई। मुर्गा फ्रांस का राष्ट्रीय प्रतीक भी है। मुर्गे की बांग को लेकर शहरी और ग्रामीण लोग बंट गए। शहरी लोगों का कहना था कि मुर्गे के सुबह-सुबह बोलने से उनकी नींद में खलल पड़ता है। पड़ोसी ने ध्वनि प्रदूषण का भी दावा किया था। वहीं ग्रामीणों को इसपर कोई ऐतराज नहीं था। आखिरकार गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि इस पक्षी का बोलना इसका अधिकार है।
मौरिस नाम के इस मुर्गे को क्रोनी फेस्सयू ने पाल रखा था। क्रोनी के वकील ने बताया, मौरिस केस जीत गया है और इसके लिए वह अपने मालिक को हर्जाने के रूप में 1000 रुपये देगा। क्रोनी ने कहा कि आज तक किसी ने मुर्गे के बोलने को लेकर ऐसे आपत्ति नहीं की। जब से एक दंपती छुट्टियां मनाने यहां आया है, इन्हीं को परेशानी है। लुइस बिरन और उनकी पत्नी की शिकायत थी कि मुर्गे के बोलने की वजह से सुबह-सुबह उनकी नींद खुल जाती है। कोर्ट के फैसले के बाद क्रोनी ने कहा कि यह उनकी तरह के सभी लोगों की जीत है। वह बेहद खुश थीं। मौरिस नाम के इस मुर्गे पर छिड़ी बहस ने लाखों लोगों को एकजुट कर दिया और लोगों ने उसके समर्थन में सेव मौरिस अभियान तक चला दिया।

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