रुद्रपुर बीआरसी में अजीम प्रेमजी की गोष्ठी में शिक्षकों ने अपने शिक्षकों को किया याद, बच्चों को संवेदनशील, तार्किक, वैज्ञानिक चेतना संपन्न नागरिक बनाने पर दिया जोर

 

रुद्रपुर। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित परिचर्चा में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा किये। उन्होंने समाज के विकास में शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने पर बल दिया।
नैनीताल रोड स्थित खंड शिक्षा कार्यालय परिसर में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने शिक्षक दिवस पर ‘मेरे प्रिय शिक्षक’ विषय पर अध्यापक और अध्यापिकाओं की परिचर्चा आयोजित की जिसमें अध्यापक-अध्यापिकाओं ने अपने विद्यार्थी जीवनकाल के अध्यापक-अध्यापिकाओं से जुड़े अनुभव साझा किये। साथ ही उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन और आज के समय की शिक्षा और अध्यापकों व्यवहार में आए अंतर की भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि अपनी निजी धारणाओं को अलग रखते बच्चों को नैतिक, तार्किक, संवेदनशील और वैज्ञानिक चेतना संपन्न नागरिक बनाने का प्रयत्न करना चाहिए। कुछ वक्ताओं ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि अधिकांश शिक्षक और शिक्षिकाएं नौकरी पा जाने तक नौकरी हासिल करने लायक जरूरी पढ़ाई करते हैं और नौकरी मिल जाने के बाद उनकी पढ़ने में कोई रुचि नहीं रहती। जबकि शिक्षकों को अखबार, पत्रिकाएं, विभिन्न विषयों और विधाओं की पुस्तकें लगातार पढ़ते रहना चाहिए जिससे उनकी अपनी समझदारी बेहतर होती है जो न सिर्फ उनके अपने जीवन की बेहतरी के लिए जरूरी है बल्कि उनके अध्यापन में भी उससे गुणवत्ता बढ़ती है।
परिचर्चा का संचालन मोअज्जम ने किया। यहां अश्विनी पाटिल, संतोष खन्ना, वीना रानी, भारती जोशी, निमिशा, सीमा नैथानी, मोहन चंद्र उपाध्याय, रमा सिंह, रेनू मलेठा, सुमन दुम्का, मीनाक्षी आर्या, प्रतिभा सक्सेना, श्रीराम चैधरी, कैलाश गिरि, कमला जोशी, कैलाश सक्सेना, देवेंद्र अर्श, एपी भारती आदि मौजूद रहे।

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