कारोबारी हालात खराब, सदियों पुरानी कंपनियां ठप्प हो रहीं, बिक रहीं, लोग संपत्तियां बेचकर भाग रहे विदेश, सबसे अमीर वारेन बफेट की कंपनी ने खरीदी बैटरी कंपनी एवरेडी, आने वाले दिनों में देश पर राज होगा बड़े देशी-विदेशी कंपनियों का राज

 

कोलकाता/नई दिल्ली/मुंबई। मोदी सरकार की खराब नीतियों, देश में खराब आर्थिक, राजनीतिक और कारोबारी स्थिति के चलते तमाम लोग अपने काम-धंधे बंद कर, संपत्तियां बेचकर विदेश में जाकर बस रहे हैं। कर्ज में डूबी बैटरी बनाने वाली देश की दिग्गज कंपनी एवरेडी को अमेरिकी कंपनी ड्यूरासेल खरीदने जा रही है। वॉरेन बफे की बर्कशर हैथवे की ड्यूरासेल इंक ने बी. एम. खेतान की फ्लैगशिप कंपनी एवरेडी इंडस्ट्रीज का बैटरी और फ्लैशलाइट बिजनस खरीदने की होड़ में एनर्जाइजर होल्डिंग्स को पीछे छोड़ दिया है। बता दें कि इससे पहले देश की कई कंपनियां कर्ज के कारण दम तोड़ चुकी हैं, जिनमें जेट एयरवेज, किंगफीशर एयरलाइंस, रिलायंस टेलिकॉम प्रमुख नाम हैं। बताया जाता है कि ड्यूरासेल 1,600-1,700 करोड़ रुपये में यह डील करने के करीब पहुंच चुकी है। इस सौदे के दायरे में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और एवरेडी ब्रांड शामिल होंगे। एक सू्त्र ने बताया कि पूरी तरह कैश में होने वाली इस स्लंप सेल वाली डील पर बातचीत आखिरी चरण में है। इसकी घोषणा जल्द की जा सकती है। इस डील से एवरेडी इंडस्ट्रीज को अपना कर्ज खत्म करने में मदद मिल सकती है।
ट्रांजैक्शन पर खेतान फैमिली और ड्यूरासेल के बीच महीनों से बातचीत हो रही है। साथ ही, अमेरिका की एनर्जाइजर से भी बातचीत चल रही थी। अमेरिका और चीन में एवरेडी ब्रांड एनर्जाइजर के पास ही है। खेतान परिवार कई प्राइवेट इक्विटी कंपनियों से भी बातचीत कर रहा था। स्लंप सेल में बेचे जा रहे एसेट के विभिन्न हिस्सों की अलग से वैल्यू नहीं लगाई जाती है। कर्ज की भेंट चढ़ी एक और कंपनी, बिकने जा रही एवरेडी, खरीदने की दौड़ में ड्यूरासेल
देश में बैटरी बनाने वाली दिग्गज कंपनी एवरेडी को वॉरेन बफेट की कंपनी ड्यूरासेल खरीदने जा रही है। इस कंपनी को खरीदने की होड़ में ड्यूरासेल ने अमेरिकी कंपनी एनर्जाइजर को पछाड़ दिया है।
कर्ज में डूबी बैटरी बनाने वाली देश की दिग्गज कंपनी एवरेडी को अमेरिकी कंपनी ड्यूरासेल खरीदने जा रही है। वॉरेन बफे की बर्कशर हैथवे की ड्यूरासेल इंक ने बी. एम. खेतान की फ्लैगशिप कंपनी एवरेडी इंडस्ट्रीज का बैटरी और फ्लैशलाइट बिजनस खरीदने की होड़ में एनर्जाइजर होल्डिंग्स को पीछे छोड़ दिया है। कि इससे पहले देश की कई कंपनियां कर्ज के कारण दम तोड़ चुकी हैं, जिनमें जेट एयरवेज, किंगफीशर एयरलाइंस, रिलायंस टेलिकॉम प्रमुख नाम हैं। सूत्रों के अनुसार, ड्यूरासेल 1,600-1,700 करोड़ रुपये में यह डील करने के करीब पहुंच चुकी है। इस सौदे के दायरे में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और एवरेडी ब्रांड शामिल होंगे। एक सू्त्र ने बताया कि पूरी तरह कैश में होने वाली इस स्लंप सेल वाली डील पर बातचीत आखिरी चरण में है। इसकी घोषणा जल्द की जा सकती है। इस डील से एवरेडी इंडस्ट्रीज को अपना कर्ज खत्म करने में मदद मिल सकती है।
ट्रांजैक्शन पर खेतान फैमिली और ड्यूरासेल के बीच महीनों से बातचीत हो रही है। साथ ही, अमेरिका की एनर्जाइजर से भी बातचीत चल रही थी। अमेरिका और चीन में एवरेडी ब्रांड एनर्जाइजर के पास ही है। खेतान परिवार कई प्राइवेट इक्विटी कंपनियों से भी बातचीत कर रहा था। स्लंप सेल में बेचे जा रहे एसेट के विभिन्न हिस्सों की अलग से वैल्यू नहीं लगाई जाती है। मामले से वाकिफ दो लोगों ने बताया कि अमेरिकी कंपनी ड्यूरासेल के केवल भारत में एवरेडी ब्रांड पर मालिकाना हक मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह 1.5 अरब बैटरियां और 2 करोड़ से ज्यादा फ्लैशलाइट्स सालाना बनाने की स्थापित क्षमता की मालिक हो जाएगी। यह बिजनस करीब 900 करोड़ रुपये की आमदनी जुटाता है।
एग्रीमेंट के अनुसार, ड्यूरासेल और विलियम्सन मैगर ग्रुप, दोनों एवरेडी इंडस्ट्रीज के मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और ब्रांड का उपयोग अपने कारोबारों के लिए करेंगे। उन्होंने बताया, एवरेडी इंडस्ट्रीज अपने ब्रांड और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का उपयोग अपने लाइटिंग और अप्लायंसेज बिजनस के लिए करती रहेगी और इसके लिए उसे रॉयल्टी नहीं देनी होगी। बैटरी और फ्लैशलाइट बिजनेस के लिए ड्यूरासेल के प्रस्तावित ऑफर के दायरे में एवरेडी इंडस्ट्रीज का लाइटिंग, इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज, कन्फेक्शनरी बिजनस और वह एफएमसीजी वेंचर नहीं है, जिनसे कुल मिलाकर करीब 500-600 करोड़ रुपये की आमदनी होती है।
एक सूत्र ने बताया कि खेतान परिवार आने वाले वर्षों में बचा हुआ कारोबार बढ़ा सकता है। इस डील के दायरे में कोलकाता के रेनी पार्क में मौजूद कंपनी के ऑफिस सहित इसका नॉन-कोर रियल एस्टेट शामिल नहीं है। इस ग्रुप पर नजर रखने वाले मार्केट ऐनालिस्ट्स का कहना है कि कोलकाता के हेड ऑफिस के अलावा चेन्नै और नई दिल्ली में कंपनी की जमीन बेचने से 200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
एक सूत्र ने कहा, यह डील अगर हो गई तो कंपनी को बड़ी राहत मिलेगी। कंपनी ऋण मुक्त हो जाएगी। उन्होंने कहा, यूको बैंक, एचडीएफसी बैंक, प्ब्प्ब्प् बैंक, आरबीएल बैंक, इंडसइंड बैंक सहित कई लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस का कुल 700 करोड़ रुपये का बकाया चुका दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कम ग्रोथ वाला प्रॉफिटेबल बैटरी बिजनस बेचा जा रहा है, लेकिन कंपनी 60-70 करोड़ रुपये सालाना की इंट्रेस्ट कॉस्ट बचा पाएगी।

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